दिन 45

कैसर को दो

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(4) “तब सब पुरनिये इकट्ठे होकर शमूएल के पास आए, और कहा, ‘हमारे लिए एक राजा नियुक्त कर जो हमारा न्याय करे; जैसे अन्य सब जातियों में है।’ पर यह बात शमूएल को बुरी लगी… शमूएल ने Yahweh से प्रार्थना की… Yahweh ने कहा, ‘…उन्होंने तुझे [शमूएल को] नहीं, मुझे ही तुच्छ जाना है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ… आज के दिन तक… वे मुझे त्यागकर अन्य देवताओं [मनुष्यों] की सेवा करते आए हैं… उनकी बात सुन ले, और उन्हें बता दे कि जो राजा उन पर राज्य करेगा वह उनके साथ कैसा बर्ताव करेगा।’

(10) …शमूएल ने कहा, “जो राजा तुम्हारे ऊपर राज्य करने के लिए चाहते हो, वह ऐसा बर्ताव करेगा… वह तुम्हारे पुत्रों को लेकर कुछ को अपने रथों की सेवा में लगाएगा… कुछ उसके घोड़े हाँकेंगे… कुछ उसके रथों के आगे-आगे दौड़ेंगे… तुम उसकी भूमि जोतोगे… उसकी फसल काटोगे… उसके युद्ध के हथियार बनाओगे… वह तुम्हारी बेटियों को लेगा… तुम्हारे सबसे अच्छे खेत छीन लेगा… तुम्हारी भेड़-बकरियों का दसवाँ भाग माँगेगा… तुम स्वयं उसके दास बन जाओगे। तुम पुकारोगे, पर Yahweh तुम्हारी न सुनेगा।”

(19) प्रजा ने शमूएल की बात सुनने से इनकार कर दिया। “नहीं, हम पर एक राजा होना ही चाहिए। तब हम भी अन्य जातियों के समान होंगे, जिनका एक राजा होगा जो हमारे लिए युद्ध लड़ेगा।” …तब Yahweh ने शमूएल को आज्ञा दी… “उनके लिए एक राजा नियुक्त कर दे…”” (1 शमूएल 8:4-22 से मुख्य अंश)

माँगो और तुम पाओगे

आओ सब, आओ सब; आगे बढ़ो,
और खुशी-खुशी अपनी भेंट चढ़ाओ।
बनानी हैं दीवारें और बिछानी हैं सड़कें,
तुम्हें राजा इतना चाहिए था।

तुम्हारे याजक और अगुवे सब सहमत हैं,
समय के साथ उनकी योजनाएँ खुलती गईं।
“मुझसे लड़ने से बेहतर है मुझे चुका देना,
तुम्हारे सबसे अच्छे मेरे खेत जोतेंगे।”

क्योंकि यदि सारी भीड़ सहमत है,
न तो चिंता करो, न घबराओ,
हमारे ही चेहरे, तुम्हारी मुद्रा हैं,
तुम्हारा भाग तो निभाना ही होगा।

दिए जाने वाले अधिकार तुम्हें बहकाने को ललचाएँगे,
तुम में से जो हृदय से सबसे दबे हुए हैं।
“राज्य के मार्ग की रक्षा सबको करनी है,
हर किसी को अपना भाग निभाना है!”

उन मूर्खों की बात पर ध्यान मत दो,
“उसमें से निकल आओ…,” वे पुकारते हैं।
“हमने वह पुस्तक पढ़ी है; हम समझते हैं।
पर, मनुष्य के भय को एक बार आज़मा लो!”

आओ सब, आओ सब; आगे बढ़ो,
और खुशी-खुशी अपनी भेंट चढ़ाओ।
बनानी हैं दीवारें और बिछानी हैं सड़कें,
तुम्हें अपना राजा मिल गया, कितने दुःख से।

“यह किसकी छाप है? और किसका नाम खुदा है?” “कैसर का,” उन्होंने उत्तर दिया। तब उसने उनसे कहा, “तो जो कैसर का है वह कैसर को दो, और जो सर्वशक्तिमान का है वह सर्वशक्तिमान को दो।” (मत्ती 22:20-21)

© Suffer Well भक्ति श्रृंखला