दिन 111

तुम्हारा अंक सिद्ध है

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धनी, मैं कहता हूँ; तुम धनी हो! मेरे पास तुम्हारा खाता सदा भरा रहेगा। कभी भी आकर उधार लो।

देखो, मेरे बच्चे, जब मैं साख देता हूँ तो वह कभी घटती नहीं। मैं उसे वापस नहीं लेता। मैं तुम्हें दिवालिया नहीं छोड़ूँगा। तुम इस साख-रेखा को सदा काम में ला सकते हो। मैं दिन के चौबीसों घंटे, सप्ताह के सातों दिन तुम्हारे मन के लिए खुला हूँ (भजन संहिता 121:4)।

मेरे वचन पढ़ो, फिर भी वह (अब्राहम) अविश्वास के कारण सर्वशक्तिमान की प्रतिज्ञा के विषय में डाँवाडोल न हुआ, परन्तु अपने विश्वास में दृढ़ हुआ और शक्तिमान को महिमा दी, इस बात का पूरा निश्चय रखते हुए कि जो कुछ उसने प्रतिज्ञा की थी उसे पूरा करने की सामर्थ्य शक्तिमान में थी। इसी कारण, "यह उसके लिये धार्मिकता गिनी गई।" [उत्पत्ति 15:6 से]

ये शब्द, "यह उसके लिये गिनी गई," केवल उसी के लिए नहीं परन्तु हमारे लिए भी लिखे गए, जिन्हें सर्वशक्तिमान धार्मिकता गिनेगा, हम जो उस पर विश्वास करते हैं जिसने हमारे स्वामी Yahshua को मृतकों में से जिलाया। वह हमारे पापों के लिये मृत्यु के हाथ में सौंपा गया और हमारे धर्मी ठहराए जाने के लिये जिलाया गया। (रोमियों 4:20-25)

क्या मैंने तुमसे कहा है कि दरिद्र के समान जियो? क्या तुम वारिस नहीं हो? (रोमियों 8:17) हाँ मेरे बच्चे, मेरे पास आओ और निकालो। मेरे पास तुम्हारा साख-अंक सिद्ध है। मेरे भण्डारों में से लो। वे यहाँ हैं, बस तुम्हारे लिये। मैं ब्याज नहीं लेता; मैं केवल यही माँगता हूँ कि तुम मुझसे प्रेम करो और मेरी आज्ञाओं का पालन करो। मेरी आज्ञाएँ तुम्हें समृद्ध करती हैं और तुम्हारी साख बढ़ाती हैं, कभी घटाती नहीं, प्रतिदिन नया धन जोड़ती हैं।

अब उसकी जो हम में कार्य करनेवाली सामर्थ्य के अनुसार, जो कुछ हम माँगते या सोचते [कल्पना करते] हैं, उससे कहीं अधिक करने में समर्थ है। (इफिसियों 3:20)

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